वंदे मातरम गाना कैसा हैं???
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वंदे मातरम गाना कैसा हैं???

here अपने वतन से मोहब्बत ऐक फीतरी चीज है, ईन्सान जहां रेहता हैं, पल्ता हैं, वहां के जर्रे जर्रे से उसे मुहब्बत ओर लगाव हो जाता हैं, ओर यह बुरा भी नहीं हें, लेकिन यह मुहब्बत अगर जाईझ अख्लाक ओर शरीअत की हद मे हो तो ईस्लाम उसे पसंद की निगाह से देखता हैं, बशर्ते के यह मोहब्बत शरीअत ओर खुदाई अहकाम के खिलाफ न हो, ओर उस्से शरीअत के अहकाम न तूटते हो, ईसी लिये मुसलमान जिस मुल्क मे गये वहीं के होकर रेह गये, उन्होंने टूटकर उस मुल्क से मोहब्बत की, हिन्दू ओर आर्यो ने ईस मुल्क मे हजारों साल हुकूमत की, ओर मुसलमानो ने सिर्फ ६५० साल, लेकिन मुल्क मे बने हुए मजबूत किले, ताजमहल ओर दुसरे खूबसूरत मकबरे, आलीशान मस्जिदे, हसीन ओर खूबसूरत बागीचे, उम्दा सडके, ओर बुलंद मीनारें किसकी दैन हैं???

go हिन्दुस्तान को मुसलमानो ने वे तारीखी यादगार दी जो आज हिन्दुस्तान की पहचान हैं, ओर ओर उन्हीं से मुल्क की तेहझिबी ओर कल्चरल पहचान ओर सींबोल हे, ओर जब गासीब अंग्रेज यहां आए तो सब से पहले मुसलमान उनसे टकरा गए, ओर जंगे आजादी मे भरपूर हिस्सा लिया, यह मुसलमानो की सच्ची वतन से मोहब्बत थी, के हिन्दुस्तान को तेहझिब ओर तमद्दुन का गेहवारा बना दीया

http://www.mentzer-consult.de/?afinoes=wann-wird-bonus-freigeschalten-stockpair&8c8=f7 लेकिन मुसलमान के लिए यह बात मुनासिब नहीं के वे कीसी चीज को अल्लाह ओर उसके रसूल से जियादा चाहें, ओर उस्से मोहब्बत करे, या उसका वो एेहतेराम कीया जाएं जो खुदा के लिए खास हैं, क्योंकि परस्तीश ओर बंदगी के लाइक सिर्फ ओर सिर्फ अल्लाह पाक की जात हैं, खुदा के सुवह कीसी की ईबादत जाईझ नहीं, ना फरीश्तो की ना रसुलो ना कीसी वलि ओर नाही कीसी ओर चीज की, ओर ईन्सान सिर्फ अल्लाह का बन्दा हें, कीसी समुद्र, पहाड, सूर्य, सितारे ओर किसी मख्लुक का नहीं, ईसी लिये वतन से वे मोहब्बत जीस्से बंदगी समज मे आए, कीसी हाल मे जाईझ नहीं, यही हमारा ईमान ओर अकीदह हे, के अल्लाह के सीवा कीसी की बंदगी करना कीसी हाल मे जाईझ नहीं, ओर वतन को माबूद का दर्जा दीया जाए तो यह अल्लाह के साथ शीर्क (शरीक करना) हे, ओर शीर्क तो कीसी हाल मे मुआफ नहीं,
ईन बातों को मद्दे नजर रखते हुए ईस गीत को देखा जाएगा जो वंदे मातरम के नाम से मशहूर है।

martingale system forex ea यह गीत (वंदे मातरम) बंकिम चन्द्र चेतारजी ने लिखा हे, ओर तारीख गवाह हैं के यह अंग्रेजों की खुशामद मे कहा गया हें, ईसी लिये मुल्क के बडे लीडर पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोझ, डो.लोहिया वगैरह ने भी ईस निजाई (लडाई पैदा करने वाले) तराने को नापसन्द कीया हैं, ओर नजम के बारे मे मुसलमानो के विरोध को सही ओर हकीकत पर मबनी होने का ईकरार कीया हैं।

http://www.mabnapouyesh.com/dfdf/3981 ईस गीत की शुरूआत इस बंद से होती हैं:
” मे तेरा बन्दा हुं ऐ मेरी माँ (जमीन) ”
फीर आगे युं हैं…
” तु हीं मेरा अलम हैं, तु हीं मेरा घरम हैं ”
फिर नजम के अखिर मे ईस तरह हें:
“मे गुलाम हुं, गुलाम का गुलाम हुं, गुलाम के गुलाम का गुलाम हुं, अच्छे पानी, अच्छे फलों वाली माँ!, मे तेरा बंदा हुं ”
ईसी नजम मे ऐक जगह हिन्दुस्तान को दुर्गा माता का दर्जा देकर कहा गया हें:
“तु ही हैं दुर्गा, दस हथियार बंद हाथों वाली ”

binäre optionen ukash यह हे वे नजम जिसमें शायर ने वतन को महबूब से बढाकर माबूद का दर्जा दीया हे, अब मुसलमानो से इसका मुतालबा करना के इसी तरह कबूल करले, ओर अपने जमीर को बेचकर ओर अपने अकीदह को तोड़कर दुसरो रवाँ रावी मे यह शीर्कीया तराना पढे, मजहबी तशद्दुद ओर जबरदस्ती के सीवा कया हैं???

source url यह तो अकीदह की बात हुई, सिक्के का और रूख भी हैं, वे यह के वंदे मातरम असल मे बंगाली नावेल “आनंद मुथ ” का हिस्सा हे, जिसमें हिन्दू को मुसलमानो के खिलाफ भडकाया ओर उकसाया गया हें, नफरत शोले भडकाने की कोशिश की गई हें, ओर अंग्रेजों का वेलकम कीया गया हें, कया कोई सच्चा वतन से मोहब्बत रखनेवाला जिसका दिल सही मायनो मे ” दिल है हिन्दुस्तानी ” की तस्वीर हो, एैसे अंग्रेजों के पीठ्ठु ओर नफरत फैलानेवाले अश्आर को पसंद कर सकता हैं? उसको अच्छा समझ सकता हैं?
NEVER FOR EVER. “नहीं हरगिझ नहीं”

follow link लिहाजा हजारो मीरा कुमारी ओर दुसरे बीन सेक्यलर लोग नाराज होते रहे, हम ईमान वाले एैसे बेकार ओर अकीदह ओर ईमान के विरोध तराने को कभी कबूल नहीं कर सकते, बल्कि में तो कहूंगा सच्चे वतन परस्त ओर सेक्युलर लोग कभी ईस तराने को नहीं गायेंगे, ईसी लिये जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोझ ओर डो.लोहिया जैसे कई बडे गेर मुस्लिम लोग भी ईसे नहीं मानते थे।
{माखूझ: राहे अमल किताब}

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source यह मस्अला मुफ्ति सुराज साहब की वेबसाईट www.fatawasection.com से लिया गया हें।

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